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बवासीर -डॉ राजीव गुप्ता, एम.बी.बी.एस. एम.डी.

>> Thursday, August 26, 2010


     बवासीर में मलद्वार या गुदा के निचले भाग की नसें फूल जाती हैं। यह एक आम रोग है। इससे अनेक झोलाछाप या नीम-हकीम डॉक्टरों की रोजी-रोटी चलती है। पचास की अवस्था के उपरान्त प्रत्येक दूसरा व्यक्ति इस रोग से ग्रस्त रहता है। शौच के समय मलद्वार से रक्त जाता है, किन्तु दर्द नहीं होता है। इतना अवश्य है कि जब कोई फूली हुई नस मलद्वार पर भिंचने लगती है तब असहनीय पीड़ा होती है।  
रोग का कारण  
     अधिकांश मामलों में दीर्घकालिक कब्ज ही होता है। कब्ज के कारण मलद्वार की नसों पर जोर पड़ता है और वे फूल जाती हैं एवं रक्त आने लगता है। 
    गर्भवती स्त्रियों में बढ़ते गर्भ के दबाव के कारण भी यह स्थिति हो सकती है। 
    बुजुर्गों में प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ जाने के कारण  लघुशंका के समय बार-बार जोर लगाने से भी बवासीर हो जाती है।
    कई बार मोटापे के कारण भी यह बीमारी हो जाती है। अनेक बार तो कई परिवारों में यह रोग वंशानुगत होता है। 
     शौच के समय निवृत्त होने पर मलद्वार से ताजा रक्त जाता है। मलद्वार से सफेद डिस्चार्ज भी जा सकता है। उस भाग में खुजली भी हो सकती है। मलद्वार के पास शिरा का फूला हुआ भाग बाहर से दिखता है। चित्रा में दिखाई दे रहा है। शौच के समय फूली हुई शिराएं बाहर आने लगती हैं। प्रारम्भ में तो ये अपने आप अन्दर चली जाती हैं। लेकिन कुछ रोगियों में ये सदैव बाहर रहने लगती हैं। यह स्थिति परेशानी की है। प्रायः दर्द नहीं होता है, लेकिन यदि दर्द हो तो समझ लें अधिक परेशानी है। बवासीर को नजरअंदाज करने से परेशानी बढ़ सकती है। कभी-कभी गंभीर स्थिति में सर्जरी की स्थिति आ जाती है।
रोग का निदान  
    प्रारम्भिक स्थिति में कब्ज दूर होने से ही समस्या दूर हो जाती है। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, सलाद, इसबगोल और पानी की मात्राा बढ़ाने से राहत मिलती है। दिन में तीन-चार बार टब में गुनगुना पानी में पोटेशियम परमैगनेट के कुछ कण डालकर उसमें बैठने से राहत मिलती है। सेक करने से भी राहत मिलती है। खुजली मिटाने वाली मलहम प्रोक्टोसेडिल, फाक्टू और एनोवेट लगाने से राहत मिलती है।
     फूली हुई शिरा को टीका लगाकर उसमें सिकुड़न लाई जा सकती है। जब टीका से आराम नहीं होता है तो इलास्टिक बैंड  बांधकर रक्त का दबाव रोका जाता है। लटकी हुई शिरा को लेजर या इन्फ्रारेड किरणों से नष्ट कर देते हैं। अधिक लटकी शिराओं को अच्छे सर्जन से कटवाकर निकालना ही अच्छा होता है। सर्जरी के बाद यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि दुबारा फिर बवासीर न हो। अच्छा यह है कि आहार सेवन ध्यान से करें व कुछ व्यायाम करें जिससे कब्ज रहे ही नहीं। 

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