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आपका इस ब्‍लॉग पर स्‍वागत है! यह ब्‍लॉग ज्‍योतिष, वास्‍तु एवं गूढ वि़द्याओं को समर्पित है। इसमें आपकी रुचि है तो यह आपका अपना ब्‍लॉग है। ज्ञानवर्धन के साथ साथ टिप्‍पणी देना न भूलें, यही हमारे परिश्रम का प्रतिफल है। आपके विचारों एवं सुझावों का स्‍वागत है।

विक्रम संवत् २०७४ की हार्दिक शुभकामनाएं

>> Tuesday, March 28, 2017

विक्रम संवत् २०७४ की हार्दिक शुभकामनाएं
नव विक्रम संवत् २०७४ आपके जीवन में सुख समृद्धि लाए, नए अवसर लाए, जीवन को सुख की सुगन्‍ध से महकाए। जय श्री  राम जय माता की...।

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अवसर कैसे पकड़ें

>> Saturday, March 25, 2017

अवसर कैसे पकड़ें
अवसर प्रतीक्षा करने पर नहीं आते हैं। अवसरों को पकड़ने के लिए उनका द्वार बार-बार खटखटाना पड़ता है। वे तभी पकड़ में आते हैं। अवसर एक से अधिक हो सकते हैं। यदि अवसर द्वार हैं और हम अधिक द्वारों को खटखटाएंगे। मान लीजिए हमने दस द्वार खटखटाए और उनमें से नौ द्वारों में हमें मना हो गयी। लेकिन दसवें द्वार में हां हो गयी। इसका मतलब हमने अवसर को पकड़ लिया। जब तक आप अवसर को पकड़ने के लिए बार-बार द्वार नहीं खटखटाएंगे तब तक वो आपकी पकड़ में नहीं आएंगे। अवसरों को पकड़ने के लिए उनका पीछा करना आवश्‍यक है। जो अवसरों का पीछा नहीं करते वे अवसरों को पकड़ नहीं पाते हैं।
अवसरों को पकड़ने के लिए उनका निरन्‍तर पीछा अवश्‍य करें।

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व्‍यवस्‍था कब आती है

>> Wednesday, March 22, 2017


जीवन में व्‍यवस्‍था योजना बनाकर समय पर सभी कार्य करने से आती है। व्‍यवस्‍था के बिना जीवन अस्‍त-व्‍यस्‍त हो जाता है। व्‍यवस्‍था से जीवन में सबकुछ अच्‍छा ही होता है। जीवन को उन्‍नति पथ पर ले जाने के लिए स्‍वयं को व्‍यवस्‍था में जीना होगा। जो व्‍यवस्‍था नहीं ला सकता है वो कदापि अपने लक्ष्‍य को नहीं पा सकता है और यदि पा भी लिया तो अपने लक्ष्‍य को सन्‍तोषजनक ढंग से नहीं पाता है। जीवन में अनुशासित रहने पर व्‍यवस्‍था का सूत्रपात होता है और प्रतिफल में मनोनुकूल फल प्राप्‍त होते हैं।

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मौन शक्तिशाली है!

>> Thursday, March 16, 2017

मौन में शक्ति होती है इसलिए वह शक्तिशाली है। मौन के कार्य की अपनी एक रीति है। रमन महर्षि ने कहा है। मौन नित्‍य वाणी है। वह वाणी का निरन्‍तर प्रवाह है जो बोलने से रुक जाता है। ये शब्‍द जो मैं बोल रहा हूं उस मौन वाणी का अवरोध करते हैं। जैसे धातु के तार में विद्युत का प्रवाह बहता है, उसे रोकने पर वह बल्ब के रूप में प्रकाश और पंखे के रूप में हवा प्रदान करता है। जिस प्रकार तार में विद्युत अव्यक्त शक्ति के रूप में रहती है उसी प्रकार मौन वाणी का नित्य प्रवाह है जो शब्दों से रुक जाता है। दीर्घकाल तक चलने वाले परस्पर वार्तालाप के उपरान्त भी जो बात समझ नहीं आती है वह बात मौन के एक क्षण में भी समझ आ जाती है। ज्ञानी का प्रभाव मौनावस्था में दूसरे पर अधिक पड़ता है। बोलने से उनका प्रभाव कम हो जाता है। मौन सर्वाधिक शक्तिशाली होता है। वाणी सदैव मौन से कम शक्तिशाली होती है। वस्तुत: परस्पर मानिसिक सम्पर्क श्रेष्ठ माना गया है। मौन कभी विश्राम नहीं करता है। मौन में मनुष्य समीप की परिस्थितियों से निकटतम सम्पर्क बना लेता है। जिसका मन दुर्बल होता है वे प्रबल मन वाले व्यक्ति के प्रभाव में आ जाता है। मन मौन के निरन्तर अभ्यास से प्रबल बनता है और शान्त होकर एकाग्रता को प्राप्त कर लेता है। 
नित्‍य बीस  मिनट तक मौन का अभ्‍यास करने से अनेक प्रकार के तनाव व मानसिक अशान्ति से मुक्ति मिलती है।

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मन की लगाम कसकर रखें!

>> Monday, March 13, 2017


मन की लगाम कसकर रखें वरना बाद में पछताना पढ़ता है। जिसने मन पर विजय पा ली वही भाग्‍यशाली एवं बुद्धिमान है। मन के दास न बनकर उसके स्‍वामी बनो और उसे अपने अनुसार चलाओ। ऐसा करने में ही भलाई है। मन को सदैव विवेक रूपी अंकुश से संभालकर रखना चाहिए। विवेक का अंकुश हटते ही मन आपको अपने अनुरूप भटका लेता है। मन को भटकने से बचाने के लिए ज्ञान रूपी चौकीदार की सहायता लेनी चाहिए। चौकीदार जागता है तो चोर चोरी नहीं कर पाता है। आप भी ज्ञान व विवेक के बल पर सजग रहकर मन के बहकावे में आने से बच सकते हैं। जब मन आपके काबू में होगा तो आपको अपनी पहचान होगी आैर आप जीवन में आत्‍मविश्‍लेषण के बल पर मन चाहा विकास कर पाएंगेा मन मैला हो जाए तो सबकुछ मैला हो जाता है। वैसे भी मन का मैल तन के ध्‍ाोने से साफ नहीं होता है। मन की लगाम कसकर रखेंगे तभी आप अपने मन को एक दिशा दे पाएंगे।
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होली आयी रे (Holi aayee re) रंगों के त्‍यौहार की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं

>> Sunday, March 12, 2017

रंगों का पर्व होली पर विशेष
आप सबको सपरिवार होली की हार्दिक शुभकामनाएं। रंगों का यह त्‍यौहार आपके जीवन में अनेक खुशियां लेकर आए।

हाइकु 5-7-5 के क्रम वाली क्षणिक कविता है और इसमें एक क्षण को उसकी सम्‍पूर्णता सहित अभिव्‍यक्‍त किया जाता है। इस वीडियो में 'होली आयी रे' के विषय में कुछ हिन्‍दी हाइकु दे रहे हैं। विश्‍वास हैं अवश्‍य पसन्‍द आएंगे। पसन्‍द आने पर लाईक, कमन्‍ट, शेयर व सब्‍सक्राईब करें। धन्‍यवाद !
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क्‍या आप महावीर हैं

>> Friday, March 10, 2017


किसी भी सत्‍य की वैचारिक स्‍वीकृति कर लेना सरल है पर उसे जीवन में अपनाकर उसके अनुसार जीवन जीना अत्‍यन्‍त कठिन है। इस प्रक्रिया में आदतें व संस्‍कार बाधक बनते हैं। अहंकार तो अनगिनत अवरोध खड़े कर बैठता है। जिसने स्‍वयं के अहंकार पर विजय पा ली वह सबसे बड़ा साहसी है। स्‍वयं को जीतने वाला ही सबसे बड़ा साहसी अर्थात् महावीर है।
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दान देने से पहले जरूर ध्‍यान रखें !

>> Tuesday, March 7, 2017



दान देने की सामर्थ्‍य हो तो अवश्‍य देना चाहिए। दान देकर जताने पर दान व्‍यर्थ चला जाता है। सच्‍चे मन से दिया गया दान कभी व्‍यर्थ नहीं जाता है। उससे अवश्‍य किसी का भला लोता है दान वही सर्वोत्‍तम होता है जिसमें आपको ज्ञात न हो कि आपने किसको दिया है। निस्‍वार्थ भाव से किया गया दान ही उत्‍तम होता है। वैसे भी गुप्‍त दान ही सब दानों में सर्वोत्‍तम होता है।
आपने मंदिर में दान दिया और आपके भाई ने भी मंदिर में दान दिया तो दोनों के मन में दान देने की थी तो उन्‍हें उनके दान का फल अलग-अलग मिलेगा। दान देकर नाम का लालच दान का फल नहीं दिलाता है। दूजे को देखकर आपने भी दान कर दिया तो उसका फल नहीं मिलता है। किसी दूसरे जीव को सुख देना ही दान है। आपने जो भी सुख दिया तो उसके प्रतिफल में आपको भी सुख मिलता  है। आपने  किसी को पुराने कपड़े दिए, आपने उसकी सहायता करी, उसे देकर आपको मन में सुख की अनुभूति भी हुई! आपने सहायता करी तो प्रतिफल में सुख या सहायता ही मिलेगी। आपने किसी को दु:ख दिया  तो आपको प्रतिफल में दु:ख मिलने की ही आशा करनी चाहिए।
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एकाग्रता से हमारे विचार एकाग्र होते हैं! एकाग्रता (Concentration)Ekaagrataa

>> Saturday, March 4, 2017

जैसा हमारा विचार एकाग्र होता है वैसा ही  हमारा ध्‍यान  होता है। ध्‍यान के अनुरूप ही हम बनते हैं आैर फिर जीवन भी उसी के अनुरूप आगे बढ़ता है।
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Takaraav(Confliction)टकराव

>> Wednesday, March 1, 2017

सुवचन सकारात्‍मक होते हैं अौर दिशा निर्धारित करते हैं। सुपथ दिखाते हैं और लक्ष्‍य प्राप्ति में सहायक होते हैं। आज के सुवचन का शीर्षक 'टकराव' है! Video को LIKE और हमारे CHANNEL को SUBSCRIBE करना ना भूले! यदि आपने अभी तक नहीं किया है तो SUBSCRIBE तुरन्‍त करें आपको नई वीडियो की जानकारी मिलती रहेगी।

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सपने

>> Monday, February 27, 2017

सुवचन सकारात्‍मक होते हैं अौर दिशा निर्धारित करते हैं। सुपथ दिखाते हैं अौर लक्ष्‍य प्राप्ति में सहायक होते हैं। आज का सुवचन का शीर्षक 'सपने' है!
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आगुन्‍तक

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