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प्रशासनिक सेवा में सफलता के ज्योतिष योग

>> Friday, February 18, 2011

   
    कुण्डली में ग्रहों से बनने वाले ज्योतिष योग ही जातक की आजीविका का क्षेत्र बताते हैं। अधिकांश लोग प्रशासनिक सेवाओं में अपना कैरियर बनाकर सफलता पाना चाहते हैं। आई. ए. एस. जैसे उच्च पद की प्राप्ति के लिये व्यक्ति की कुण्डली में सर्वप्रथम शिक्षा का स्तर सर्वोत्तम होना चाहिए।
    कुंडली के दूसरे, चतुर्थ, पंचम एवं नवम भाव व भावेशों के बली होने पर जातक की शिक्षा उतम होती है। शिक्षा के कारक ग्रह बुध, गुरु व मंगल बली होने चाहिएं, यदि ये बली हैं तो विशिष्ट शिक्षा मिलती है और जातक के लिए सफलता का मार्ग खोलती है।
    छठा, पहला व दशम भाव व भावेश बली हों तो प्रतियोगी परीक्षा में सफलता अवश्य मिलती है। सफलता के लिये समर्पण, एकाग्रता एवं परिश्रम की आवश्यकता होती है। इसका बोध तीसरे भाव एवं तृतीयेश के बली होने पर होता है। यदि ये बली हैं तो जातक में समर्पण, एकाग्रता एवं परिश्रम करने की क्षमता होती है और व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा में सफलता की मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
    सूर्य को राजा है और गुरु को ज्ञान का कारक कहा गया है।  ये दोनों  ग्रह मुख्य रूप से प्रशासनिक प्रतियोगिताओं में सफलता और उच्च पद प्राप्ति में सहायक हैं।  जनता से अधिक वास्ता पड़ता है इसलिए शनि का बली होना अत्यन्त आवश्यक है। शनि जनता व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच की कड़ी है। मंगल को स्याही व बुध को कलम कहा जाता है और ये बली हों तो जातक अपनी कलम का लोहा नौकरी में अवश्य  मनवाता है।
    प्रशासनिक अधिकारी बनकर सफलता पाने के लिए सूर्य, गुरु, मंगल, राहु व चन्द्र आदि ग्रह बली होने चाहिए। मंगल से जातक में साहस एवं पराक्रम आता है जोकि अत्यन्त आवश्यक है। सूर्य से नेतृत्व करने की क्षमता मिलती है, गुरु से विवेक सम्मत निर्णय लेने की क्षमता मिलती है और चन्द्र से शालीनता आती है एवं मस्तिष्क स्थिर रहता है।
    यदि कुण्डली में अमात्यकारक ग्रह बली है अर्थात्‌ स्वराशि, उच्च या वर्गोत्तम में है एवं केन्द्र में हो या तीसरे या दसवें हो तो अत्यन्त उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
    अमात्यकारक ग्रह नवांश में आत्मकारक ग्रह से केन्द्र, तीसरे या एकादशा भाव में हो तो जातक बाधा रहित नौकरी करता है।
एकादशेश नौवें भाव में हो या दशमेश के साथ युत हो या दृष्ट हो तो जातक में प्रशासनिक अधिकारी बनने की संभावना अधिक होती है।
पंचम भाव में उच्च का गुरु या शुक्र हो और उस पर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो एवं सूर्य अच्छी स्थिति में हो तो जातक इन दशाओं में उच्च प्रशासनिक अधिकारी बनता है।
    लग्नेश और दशमेश स्वराशि या उच्च का होकर केन्द्र या त्रिकोण में स्थित हो और गुरु उच्च या स्वराशि में हो तो जातक प्रशासनिक अधिकारी बनता है।
    लग्न में सूर्य और बुध हो और गुरु की शुभ दृष्टि इन पर हो तो जातक प्रशासनिक सेवा में उच्च पद प्राप्त करने में सफल रहता है।
    कुण्डली में नौकरी में सफलता मिलने की संभावनाएं और अधिक हो जाती है यदि  इन कारक ग्रहों की दशाएं भी मिल जाएं।
    आई.ए.एस. बनने के लिये तृतीयेश, षष्ठेश, दशमेश व एकादशेश की दशा मिलनी सोने में सुहागा होता है अर्थात्‌ सफलता निश्चित है!
    दशम भाव में सर्वाष्टक वर्ग की संख्या से कम संख्या पंचम भाव में होनी चाहिए। ऐसा हो तो नौकरी में कैरियर अच्‍छा रहता है।
    दशम में कम एवं एकादश में सर्वाष्टक वर्ग की संख्या अधिक होनी चाहिए। यह अन्‍तर जितना अधिक होता है ऐसा होने पर अल्‍प श्रम में अधिक लाभ्‍ा होता है।
    तीसरे, छठे, दसवें, एकादश में सर्वाष्टक वर्ग की संख्या बढ़ते क्रम में हो तो प्रशासनिक सेवाओं में धन, यश एवं उन्नति तीनों एक साथ मिलते हैं! ऐसे अधिकारी की सभी प्रशंसा करते हैं!
    उक्त ज्योतिष योग कुण्डली में विचार कर आप जातक के प्रशासनिक सेवाओं में सफलता का निर्णय करके जातक को उचित सलाह देकर यश एवं धन के भागी बन सकते हैं! ये योग इस क्षेत्र में अच्छा कैरियर बनाते हैं!

1 comments:

अम्बरीष कुमार गोपाल February 18, 2011 at 10:32 PM  

अभूतपूर्व लेख है। पहली बार प्रशासनिक सेवाओं में सफलता हेतु ज्योतिषीय योगों का इतना विशद विवरण पढ़ने को मिला। हृदय गद्गद हो गया। पाराशरी ज्योतिष और जैमिनी ज्योतिष दोनों से संबंधित योगों का अनूठा
संगम पढ़ने को मिला। धन्यवाद।

गोपाल

आगुन्‍तक

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